Book 3 • Chapter 8
Section 8
10 verses
Verse 1
कह मुनि सुनु रघुबीर कृपाला संकर मानस राजमराला
Verse 2
जात रहेउँ बिरंचि के धामा सुनेउँ श्रवन बन ऐहहिं रामा
Verse 3
चितवत पंथ रहेउँ दिन राती अब प्रभु देखि जुड़ानी छाती
Verse 4
नाथ सकल साधन मैं हीना कीन्ही कृपा जानि जन दीना
Verse 5
सो कछु देव न मोहि निहोरा निज पन राखेउ जन मन चोरा
Verse 6
तब लगि रहहु दीन हित लागी जब लगि मिलौं तुम्हहि तनु त्यागी
Verse 7
जोग जग्य जप तप ब्रत कीन्हा प्रभु कहँ देइ भगति बर लीन्हा
Verse 8
एहि बिधि सर रचि मुनि सरभंगा बैठे हृदयँ छाड़ि सब संगा
Verse 9
सीता अनुज समेत प्रभु नील जलद तनु स्याम
Verse 10
मम हियँ बसहु निरंतर सगुनरुप श्रीराम
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