Book 2 • Chapter 1
Section 1
10 verses
Verse 1
जब तें रामु ब्याहि घर आए नित नव मंगल मोद बधाए
Verse 2
भुवन चारिदस भूधर भारी सुकृत मेघ बरषहि सुख बारी
Verse 3
रिधि सिधि संपति नदीं सुहाई उमगि अवध अंबुधि कहुँ आई
Verse 4
मनिगन पुर नर नारि सुजाती सुचि अमोल सुंदर सब भाँती
Verse 5
कहि न जाइ कछु नगर बिभूती जनु एतनिअ बिरंचि करतूती
Verse 6
सब बिधि सब पुर लोग सुखारी रामचंद मुख चंदु निहारी
Verse 7
मुदित मातु सब सखीं सहेली फलित बिलोकि मनोरथ बेली
Verse 8
राम रूपु गुनसीलु सुभाऊ प्रमुदित होइ देखि सुनि राऊ
Verse 9
सब कें उर अभिलाषु अस कहहिं मनाइ महेसु
Verse 10
आप अछत जुबराज पद रामहि देउ नरेसु
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