Book 2 • Chapter 207
Section 207
10 verses
Verse 1
यहउ कहत भल कहिहि न कोऊ लोकु बेद बुध संमत दोऊ
Verse 2
तात तुम्हार बिमल जसु गाई पाइहि लोकउ बेदु बड़ाई
Verse 3
लोक बेद संमत सबु कहई जेहि पितु देइ राजु सो लहई
Verse 4
राउ सत्यब्रत तुम्हहि बोलाई देत राजु सुखु धरमु बड़ाई
Verse 5
राम गवनु बन अनरथ मूला जो सुनि सकल बिस्व भइ सूला
Verse 6
सो भावी बस रानि अयानी करि कुचालि अंतहुँ पछितानी
Verse 7
तहँउँ तुम्हार अलप अपराधू कहै सो अधम अयान असाधू
Verse 8
करतेहु राजु त तुम्हहि न दोषू रामहि होत सुनत संतोषू
Verse 9
अब अति कीन्हेहु भरत भल तुम्हहि उचित मत एहु
Verse 10
सकल सुमंगल मूल जग रघुबर चरन सनेहु
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