Book 2 • Chapter 209
Section 209
10 verses
Verse 1
नव बिधु बिमल तात जसु तोरा रघुबर किंकर कुमुद चकोरा
Verse 2
उदित सदा अँथइहि कबहूँ ना घटिहि न जग नभ दिन दिन दूना
Verse 3
कोक तिलोक प्रीति अति करिही प्रभु प्रताप रबि छबिहि न हरिही
Verse 4
निसि दिन सुखद सदा सब काहू ग्रसिहि न कैकइ करतबु राहू
Verse 5
पूरन राम सुपेम पियूषा गुर अवमान दोष नहिं दूषा
Verse 6
राम भगत अब अमिअँ अघाहूँ कीन्हेहु सुलभ सुधा बसुधाहूँ
Verse 7
भूप भगीरथ सुरसरि आनी सुमिरत सकल सुंमगल खानी
Verse 8
दसरथ गुन गन बरनि न जाहीं अधिकु कहा जेहि सम जग नाहीं
Verse 9
जासु सनेह सकोच बस राम प्रगट भए आइ
Verse 10
जे हर हिय नयननि कबहुँ निरखे नहीं अघाइ
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