Book 2 • Chapter 309
Section 309
10 verses
Verse 1
धन्य भरत जय राम गोसाईं कहत देव हरषत बरिआई
Verse 2
मुनि मिथिलेस सभाँ सब काहू भरत बचन सुनि भयउ उछाहू
Verse 3
भरत राम गुन ग्राम सनेहू पुलकि प्रसंसत राउ बिदेहू
Verse 4
सेवक स्वामि सुभाउ सुहावन नेमु पेमु अति पावन पावन
Verse 5
मति अनुसार सराहन लागे सचिव सभासद सब अनुरागे
Verse 6
सुनि सुनि राम भरत संबादू दुहु समाज हियँ हरषु बिषादू
Verse 7
राम मातु दुखु सुखु सम जानी कहि गुन राम प्रबोधीं रानी
Verse 8
एक कहहिं रघुबीर बड़ाई एक सराहत भरत भलाई
Verse 9
अत्रि कहेउ तब भरत सन सैल समीप सुकूप
Verse 10
राखिअ तीरथ तोय तहँ पावन अमिअ अनूप
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