Book 1 • Chapter 123
Section 123
9 verses
Verse 1
मुकुत न भए हते भगवाना तीनि जनम द्विज बचन प्रवाना
Verse 2
एक बार तिन्ह के हित लागी धरेउ सरीर भगत अनुरागी
Verse 3
कस्यप अदिति तहाँ पितु माता दसरथ कौसल्या बिख्याता
Verse 4
एक कलप एहि बिधि अवतारा चरित्र पवित्र किए संसारा
Verse 5
एक कलप सुर देखि दुखारे समर जलंधर सन सब हारे
Verse 6
संभु कीन्ह संग्राम अपारा दनुज महाबल मरइ न मारा
Verse 7
परम सती असुराधिप नारी तेहि बल ताहि न जितहिं पुरारी
Verse 8
छल करि टारेउ तासु ब्रत प्रभु सुर कारज कीन्ह
Verse 9
जब तेहि जानेउ मरम तब श्राप कोप करि दीन्ह
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