Book 1 • Chapter 207
Section 207
12 verses
Verse 1
मुनि आगमन सुना जब राजा मिलन गयऊ लै बिप्र समाजा
Verse 2
करि दंडवत मुनिहि सनमानी निज आसन बैठारेन्हि आनी
Verse 3
चरन पखारि कीन्हि अति पूजा मो सम आजु धन्य नहिं दूजा
Verse 4
बिबिध भाँति भोजन करवावा मुनिवर हृदयँ हरष अति पावा
Verse 5
पुनि चरननि मेले सुत चारी राम देखि मुनि देह बिसारी
Verse 6
भए मगन देखत मुख सोभा जनु चकोर पूरन ससि लोभा
Verse 7
तब मन हरषि बचन कह राऊ मुनि अस कृपा न कीन्हिहु काऊ
Verse 8
केहि कारन आगमन तुम्हारा कहहु सो करत न लावउँ बारा
Verse 9
असुर समूह सतावहिं मोही मै जाचन आयउँ नृप तोही
Verse 10
अनुज समेत देहु रघुनाथा निसिचर बध मैं होब सनाथा
Verse 11
देहु भूप मन हरषित तजहु मोह अग्यान
Verse 12
धर्म सुजस प्रभु तुम्ह कौं इन्ह कहँ अति कल्यान
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