Book 1 • Chapter 256
Section 256
10 verses
Verse 1
सखि सब कौतुक देखनिहारे जेठ कहावत हितू हमारे
Verse 2
कोउ न बुझाइ कहइ गुर पाहीं ए बालक असि हठ भलि नाहीं
Verse 3
रावन बान छुआ नहिं चापा हारे सकल भूप करि दापा
Verse 4
सो धनु राजकुअँर कर देहीं बाल मराल कि मंदर लेहीं
Verse 5
भूप सयानप सकल सिरानी सखि बिधि गति कछु जाति न जानी
Verse 6
बोली चतुर सखी मृदु बानी तेजवंत लघु गनिअ न रानी
Verse 7
कहँ कुंभज कहँ सिंधु अपारा सोषेउ सुजसु सकल संसारा
Verse 8
रबि मंडल देखत लघु लागा उदयँ तासु तिभुवन तम भागा
Verse 9
मंत्र परम लघु जासु बस बिधि हरि हर सुर सर्ब
Verse 10
महामत्त गजराज कहुँ बस कर अंकुस खर्ब
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