Book 1 • Chapter 358
Section 358
10 verses
Verse 1
नीदउँ बदन सोह सुठि लोना मनहुँ साँझ सरसीरुह सोना
Verse 2
घर घर करहिं जागरन नारीं देहिं परसपर मंगल गारीं
Verse 3
पुरी बिराजति राजति रजनी रानीं कहहिं बिलोकहु सजनी
Verse 4
सुंदर बधुन्ह सासु लै सोई फनिकन्ह जनु सिरमनि उर गोई
Verse 5
प्रात पुनीत काल प्रभु जागे अरुनचूड़ बर बोलन लागे
Verse 6
बंदि मागधन्हि गुनगन गाए पुरजन द्वार जोहारन आए
Verse 7
बंदि बिप्र सुर गुर पितु माता पाइ असीस मुदित सब भ्राता
Verse 8
जननिन्ह सादर बदन निहारे भूपति संग द्वार पगु धारे
Verse 9
कीन्ह सौच सब सहज सुचि सरित पुनीत नहाइ
Verse 10
प्रातक्रिया करि तात पहिं आए चारिउ भाइ
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