Book 1 • Chapter 42
Section 42
10 verses
Verse 1
कीरति सरित छहूँ रितु रूरी समय सुहावनि पावनि भूरी
Verse 2
हिम हिमसैलसुता सिव ब्याहू सिसिर सुखद प्रभु जनम उछाहू
Verse 3
बरनब राम बिबाह समाजू सो मुद मंगलमय रितुराजू
Verse 4
ग्रीषम दुसह राम बनगवनू पंथकथा खर आतप पवनू
Verse 5
बरषा घोर निसाचर रारी सुरकुल सालि सुमंगलकारी
Verse 6
राम राज सुख बिनय बड़ाई बिसद सुखद सोइ सरद सुहाई
Verse 7
सती सिरोमनि सिय गुनगाथा सोइ गुन अमल अनूपम पाथा
Verse 8
भरत सुभाउ सुसीतलताई सदा एकरस बरनि न जाई
Verse 9
अवलोकनि बोलनि मिलनि प्रीति परसपर हास
Verse 10
भायप भलि चहु बंधु की जल माधुरी सुबास
0:000:00
Speed: