Book 4 • Chapter 19
Section 19
10 verses
Verse 1
इहाँ पवनसुत हृदयँ बिचारा राम काजु सुग्रीवँ बिसारा
Verse 2
निकट जाइ चरनन्हि सिरु नावा चारिहु बिधि तेहि कहि समुझावा
Verse 3
सुनि सुग्रीवँ परम भय माना बिषयँ मोर हरि लीन्हेउ ग्याना
Verse 4
अब मारुतसुत दूत समूहा पठवहु जहँ तहँ बानर जूहा
Verse 5
कहहु पाख महुँ आव न जोई मोरें कर ता कर बध होई
Verse 6
तब हनुमंत बोलाए दूता सब कर करि सनमान बहूता
Verse 7
भय अरु प्रीति नीति देखाई चले सकल चरनन्हि सिर नाई
Verse 8
एहि अवसर लछिमन पुर आए क्रोध देखि जहँ तहँ कपि धाए
Verse 9
धनुष चढ़ाइ कहा तब जारि करउँ पुर छार
Verse 10
ब्याकुल नगर देखि तब आयउ बालिकुमार
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