Book 6 • Chapter 121
Section 121
12 verses
Verse 1
प्रभु हनुमंतहि कहा बुझाई धरि बटु रूप अवधपुर जाई
Verse 2
भरतहि कुसल हमारि सुनाएहु समाचार लै तुम्ह चलि आएहु
Verse 3
तुरत पवनसुत गवनत भयउ तब प्रभु भरद्वाज पहिं गयऊ
Verse 4
नाना बिधि मुनि पूजा कीन्ही अस्तुती करि पुनि आसिष दीन्ही
Verse 5
मुनि पद बंदि जुगल कर जोरी चढ़ि बिमान प्रभु चले बहोरी
Verse 6
इहाँ निषाद सुना प्रभु आए नाव नाव कहँ लोग बोलाए
Verse 7
सुरसरि नाघि जान तब आयो उतरेउ तट प्रभु आयसु पायो
Verse 8
तब सीताँ पूजी सुरसरी बहु प्रकार पुनि चरनन्हि परी
Verse 9
दीन्हि असीस हरषि मन गंगा सुंदरि तव अहिवात अभंगा
Verse 10
सुनत गुहा धायउ प्रेमाकुल आयउ निकट परम सुख संकुल
Verse 11
प्रभुहि सहित बिलोकि बैदेही परेउ अवनि तन सुधि नहिं तेही
Verse 12
प्रीति परम बिलोकि रघुराई हरषि उठाइ लियो उर लाई
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