Book 6 • Chapter 56
Section 56
10 verses
Verse 1
राम चरन सरसिज उर राखी चला प्रभंजन सुत बल भाषी
Verse 2
उहाँ दूत एक मरमु जनावा रावन कालनेमि गृह आवा
Verse 3
दसमुख कहा मरमु तेहिं सुना पुनि पुनि कालनेमि सिरु धुना
Verse 4
देखत तुम्हहि नगरु जेहिं जारा तासु पंथ को रोकन पारा
Verse 5
भजि रघुपति करु हित आपना छाँड़हु नाथ मृषा जल्पना
Verse 6
नील कंज तनु सुंदर स्यामा हृदयँ राखु लोचनाभिरामा
Verse 7
मैं तैं मोर मूढ़ता त्यागू महा मोह निसि सूतत जागू
Verse 8
काल ब्याल कर भच्छक जोई सपनेहुँ समर कि जीतिअ सोई
Verse 9
सुनि दसकंठ रिसान अति तेहिं मन कीन्ह बिचार
Verse 10
राम दूत कर मरौं बरु यह खल रत मल भार
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