Book 7 • Chapter 52
Section 52
9 verses
Verse 1
गिरिजा सुनहु बिसद यह कथा मैं सब कही मोरि मति जथा
Verse 2
राम चरित सत कोटि अपारा श्रुति सारदा न बरनै पारा
Verse 3
राम अनंत अनंत गुनानी जन्म कर्म अनंत नामानी
Verse 4
जल सीकर महि रज गनि जाहीं रघुपति चरित न बरनि सिराहीं
Verse 5
बिमल कथा हरि पद दायनी भगति होइ सुनि अनपायनी
Verse 6
उमा कहिउँ सब कथा सुहाई जो भुसुंडि खगपतिहि सुनाई
Verse 7
कछुक राम गुन कहेउँ बखानी अब का कहौं सो कहहु भवानी
Verse 8
सुनि सुभ कथा उमा हरषानी बोली अति बिनीत मृदु बानी
Verse 9
धन्य धन्य मैं धन्य पुरारी सुनेउँ राम गुन भव भय हारी
0:000:00
Speed: