Book 7 • Chapter 98
Section 98
8 verses
Verse 1
बरन धर्म नहिं आश्रम चारी श्रुति बिरोध रत सब नर नारी
Verse 2
द्विज श्रुति बेचक भूप प्रजासन कोउ नहिं मान निगम अनुसासन
Verse 3
मारग सोइ जा कहुँ जोइ भावा पंडित सोइ जो गाल बजावा
Verse 4
मिथ्यारंभ दंभ रत जोई ता कहुँ संत कहइ सब कोई
Verse 5
सोइ सयान जो परधन हारी जो कर दंभ सो बड़ आचारी
Verse 6
जौ कह झूँठ मसखरी जाना कलिजुग सोइ गुनवंत बखाना
Verse 7
निराचार जो श्रुति पथ त्यागी कलिजुग सोइ ग्यानी सो बिरागी
Verse 8
जाकें नख अरु जटा बिसाला सोइ तापस प्रसिद्ध कलिकाला
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