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Ramayana Singer

श्रीमद्वाल्मीकीयरामायणम्

Book 3 • Chapter 2

Section 2

16 verses

Verse 1
प्रेरित मंत्र ब्रह्मसर धावा चला भाजि बायस भय पावा
Verse 2
धरि निज रुप गयउ पितु पाहीं राम बिमुख राखा तेहि नाहीं
Verse 3
भा निरास उपजी मन त्रासा जथा चक्र भय रिषि दुर्बासा
Verse 4
ब्रह्मधाम सिवपुर सब लोका फिरा श्रमित ब्याकुल भय सोका
Verse 5
काहूँ बैठन कहा  ओही राखि को सकइ राम कर द्रोही
Verse 6
मातु मृत्यु पितु समन समाना सुधा होइ बिष सुनु हरिजाना
Verse 7
मित्र करइ सत रिपु कै करनी ता कहँ बिबुधनदी बैतरनी
Verse 8
सब जगु ताहि अनलहु ते ताता जो रघुबीर बिमुख सुनु भ्राता
Verse 9
नारद देखा बिकल जयंता लागि दया कोमल चित संता
Verse 10
पठवा तुरत राम पहिं ताही कहेसि पुकारि प्रनत हित पाही
Verse 11
आतुर सभय गहेसि पद जाई त्राहि त्राहि दयाल रघुराई
Verse 12
अतुलित बल अतुलित प्रभुताई मैं मतिमंद जानि नहिं पाई
Verse 13
निज कृत कर्म जनित फल पायउँ अब प्रभु पाहि सरन तकि आयउँ
Verse 14
सुनि कृपाल अति आरत बानी एकनयन करि तजा भवानी
Verse 15
कीन्ह मोह बस द्रोह जद्यपि तेहि कर बध उचित
Verse 16
प्रभु छाड़ेउ करि छोह को कृपाल रघुबीर सम
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