Book 2 • Chapter 10
Section 10
10 verses
Verse 1
बरनि राम गुन सीलु सुभाऊ बोले प्रेम पुलकि मुनिराऊ
Verse 2
भूप सजेउ अभिषेक समाजू चाहत देन तुम्हहि जुबराजू
Verse 3
राम करहु सब संजम आजू जौं बिधि कुसल निबाहै काजू
Verse 4
गुरु सिख देइ राय पहिं गयउ राम हृदयँ अस बिसमउ भयऊ
Verse 5
जनमे एक संग सब भाई भोजन सयन केलि लरिकाई
Verse 6
करनबेध उपबीत बिआहा संग संग सब भए उछाहा
Verse 7
बिमल बंस यहु अनुचित एकू बंधु बिहाइ बड़ेहि अभिषेकू
Verse 8
प्रभु सप्रेम पछितानि सुहाई हरउ भगत मन कै कुटिलाई
Verse 9
तेहि अवसर आए लखन मगन प्रेम आनंद
Verse 10
सनमाने प्रिय बचन कहि रघुकुल कैरव चंद
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