Book 2 • Chapter 9
Section 9
10 verses
Verse 1
तब नरनाहँ बसिष्ठु बोलाए रामधाम सिख देन पठाए
Verse 2
गुर आगमनु सुनत रघुनाथा द्वार आइ पद नायउ माथा
Verse 3
सादर अरघ देइ घर आने सोरह भाँति पूजि सनमाने
Verse 4
गहे चरन सिय सहित बहोरी बोले रामु कमल कर जोरी
Verse 5
सेवक सदन स्वामि आगमनू मंगल मूल अमंगल दमनू
Verse 6
तदपि उचित जनु बोलि सप्रीती पठइअ काज नाथ असि नीती
Verse 7
प्रभुता तजि प्रभु कीन्ह सनेहू भयउ पुनीत आजु यहु गेहू
Verse 8
आयसु होइ सो करौं गोसाई सेवक लहइ स्वामि सेवकाई
Verse 9
सुनि सनेह साने बचन मुनि रघुबरहि प्रसंस
Verse 10
राम कस न तुम्ह कहहु अस हंस बंस अवतंस
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