Book 2 • Chapter 8
Section 8
9 verses
Verse 1
प्रथम जाइ जिन्ह बचन सुनाए भूषन बसन भूरि तिन्ह पाए
Verse 2
प्रेम पुलकि तन मन अनुरागीं मंगल कलस सजन सब लागीं
Verse 3
चौकें चारु सुमित्राँ पुरी मनिमय बिबिध भाँति अति रुरी
Verse 4
आनँद मगन राम महतारी दिए दान बहु बिप्र हँकारी
Verse 5
पूजीं ग्रामदेबि सुर नागा कहेउ बहोरि देन बलिभागा
Verse 6
जेहि बिधि होइ राम कल्यानू देहु दया करि सो बरदानू
Verse 7
गावहिं मंगल कोकिलबयनीं बिधुबदनीं मृगसावकनयनीं
Verse 8
राम राज अभिषेकु सुनि हियँ हरषे नर नारि
Verse 9
लगे सुमंगल सजन सब बिधि अनुकूल बिचारि
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