Book 2 • Chapter 101
Section 101
10 verses
Verse 1
कृपासिंधु बोले मुसुकाई सोइ करु जेंहि तव नाव न जाई
Verse 2
वेगि आनु जल पाय पखारू होत बिलंबु उतारहि पारू
Verse 3
जासु नाम सुमरत एक बारा उतरहिं नर भवसिंधु अपारा
Verse 4
सोइ कृपालु केवटहि निहोरा जेहिं जगु किय तिहु पगहु ते थोरा
Verse 5
पद नख निरखि देवसरि हरषी सुनि प्रभु बचन मोहँ मति करषी
Verse 6
केवट राम रजायसु पावा पानि कठवता भरि लेइ आवा
Verse 7
अति आनंद उमगि अनुरागा चरन सरोज पखारन लागा
Verse 8
बरषि सुमन सुर सकल सिहाहीं एहि सम पुन्यपुंज कोउ नाहीं
Verse 9
पद पखारि जलु पान करि आपु सहित परिवार
Verse 10
पितर पारु करि प्रभुहि पुनि मुदित गयउ लेइ पार
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