Book 2 • Chapter 105
Section 105
10 verses
Verse 1
तेहि दिन भयउ बिटप तर बासू लखन सखाँ सब कीन्ह सुपासू
Verse 2
प्रात प्रातकृत करि रधुसाई तीरथराजु दीख प्रभु जाई
Verse 3
सचिव सत्य श्रध्दा प्रिय नारी माधव सरिस मीतु हितकारी
Verse 4
चारि पदारथ भरा भँडारु पुन्य प्रदेस देस अति चारु
Verse 5
छेत्र अगम गढ़ु गाढ़ सुहावा सपनेहुँ नहिं प्रतिपच्छिन्ह पावा
Verse 6
सेन सकल तीरथ बर बीरा कलुष अनीक दलन रनधीरा
Verse 7
संगमु सिंहासनु सुठि सोहा छत्रु अखयबटु मुनि मनु मोहा
Verse 8
चवँर जमुन अरु गंग तरंगा देखि होहिं दुख दारिद भंगा
Verse 9
सेवहिं सुकृति साधु सुचि पावहिं सब मनकाम
Verse 10
बंदी बेद पुरान गन कहहिं बिमल गुन ग्राम
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