Book 2 • Chapter 104
Section 104
10 verses
Verse 1
गंग बचन सुनि मंगल मूला मुदित सीय सुरसरि अनुकुला
Verse 2
तब प्रभु गुहहि कहेउ घर जाहू सुनत सूख मुखु भा उर दाहू
Verse 3
दीन बचन गुह कह कर जोरी बिनय सुनहु रघुकुलमनि मोरी
Verse 4
नाथ साथ रहि पंथु देखाई करि दिन चारि चरन सेवकाई
Verse 5
जेहिं बन जाइ रहब रघुराई परनकुटी मैं करबि सुहाई
Verse 6
तब मोहि कहँ जसि देब रजाई सोइ करिहउँ रघुबीर दोहाई
Verse 7
सहज सनेह राम लखि तासु संग लीन्ह गुह हृदय हुलासू
Verse 8
पुनि गुहँ ग्याति बोलि सब लीन्हे करि परितोषु बिदा तब कीन्हे
Verse 9
तब गनपति सिव सुमिरि प्रभु नाइ सुरसरिहि माथ
Verse 10
सखा अनुज सिया सहित बन गवनु कीन्ह रधुनाथ
0:000:00
Speed: