Book 2 • Chapter 12
Section 12
10 verses
Verse 1
सुनि सुर बिनय ठाढ़ि पछिताती भइउँ सरोज बिपिन हिमराती
Verse 2
देखि देव पुनि कहहिं निहोरी मातु तोहि नहिं थोरिउ खोरी
Verse 3
बिसमय हरष रहित रघुराऊ तुम्ह जानहु सब राम प्रभाऊ
Verse 4
जीव करम बस सुख दुख भागी जाइअ अवध देव हित लागी
Verse 5
बार बार गहि चरन सँकोचौ चली बिचारि बिबुध मति पोची
Verse 6
ऊँच निवासु नीचि करतूती देखि न सकहिं पराइ बिभूती
Verse 7
आगिल काजु बिचारि बहोरी करहहिं चाह कुसल कबि मोरी
Verse 8
हरषि हृदयँ दसरथ पुर आई जनु ग्रह दसा दुसह दुखदाई
Verse 9
नामु मंथरा मंदमति चेरी कैकेइ केरि
Verse 10
अजस पेटारी ताहि करि गई गिरा मति फेरि
0:000:00
Speed: