Book 2 • Chapter 126
Section 126
8 verses
Verse 1
देखि पाय मुनिराय तुम्हारे भए सुकृत सब सुफल हमारे
Verse 2
अब जहँ राउर आयसु होई मुनि उदबेगु न पावै कोई
Verse 3
मुनि तापस जिन्ह तें दुखु लहहीं ते नरेस बिनु पावक दहहीं
Verse 4
मंगल मूल बिप्र परितोषू दहइ कोटि कुल भूसुर रोषू
Verse 5
अस जियँ जानि कहिअ सोइ ठाऊँ सिय सौमित्रि सहित जहँ जाऊँ
Verse 6
तहँ रचि रुचिर परन तृन साला बासु करौ कछु काल कृपाला
Verse 7
सहज सरल सुनि रघुबर बानी साधु साधु बोले मुनि ग्यानी
Verse 8
कस न कहहु अस रघुकुलकेतू तुम्ह पालक संतत श्रुति सेतू
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