Book 2 • Chapter 127
Section 127
10 verses
Verse 1
जगु पेखन तुम्ह देखनिहारे बिधि हरि संभु नचावनिहारे
Verse 2
तेउ न जानहिं मरमु तुम्हारा औरु तुम्हहि को जाननिहारा
Verse 3
सोइ जानइ जेहि देहु जनाई जानत तुम्हहि तुम्हइ होइ जाई
Verse 4
तुम्हरिहि कृपाँ तुम्हहि रघुनंदन जानहिं भगत भगत उर चंदन
Verse 5
चिदानंदमय देह तुम्हारी बिगत बिकार जान अधिकारी
Verse 6
नर तनु धरेहु संत सुर काजा कहहु करहु जस प्राकृत राजा
Verse 7
राम देखि सुनि चरित तुम्हारे जड़ मोहहिं बुध होहिं सुखारे
Verse 8
तुम्ह जो कहहु करहु सबु साँचा जस काछिअ तस चाहिअ नाचा
Verse 9
पूँछेहु मोहि कि रहौं कहँ मैं पूँछत सकुचाउँ
Verse 10
जहँ न होहु तहँ देहु कहि तुम्हहि देखावौं ठाउँ
0:000:00
Speed: