Book 2 • Chapter 132
Section 132
10 verses
Verse 1
एहि बिधि मुनिबर भवन देखाए बचन सप्रेम राम मन भाए
Verse 2
कह मुनि सुनहु भानुकुलनायक आश्रम कहउँ समय सुखदायक
Verse 3
चित्रकूट गिरि करहु निवासू तहँ तुम्हार सब भाँति सुपासू
Verse 4
सैलु सुहावन कानन चारू करि केहरि मृग बिहग बिहारू
Verse 5
नदी पुनीत पुरान बखानी अत्रिप्रिया निज तपबल आनी
Verse 6
सुरसरि धार नाउँ मंदाकिनि जो सब पातक पोतक डाकिनि
Verse 7
अत्रि आदि मुनिबर बहु बसहीं करहिं जोग जप तप तन कसहीं
Verse 8
चलहु सफल श्रम सब कर करहू राम देहु गौरव गिरिबरहू
Verse 9
चित्रकूट महिमा अमित कहीं महामुनि गाइ
Verse 10
आए नहाए सरित बर सिय समेत दोउ भाइ
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