Book 2 • Chapter 138
Section 138
10 verses
Verse 1
केरि केहरि कपि कोल कुरंगा बिगतबैर बिचरहिं सब संगा
Verse 2
फिरत अहेर राम छबि देखी होहिं मुदित मृगबंद बिसेषी
Verse 3
बिबुध बिपिन जहँ लगि जग माहीं देखि राम बनु सकल सिहाहीं
Verse 4
सुरसरि सरसइ दिनकर कन्या मेकलसुता गोदावरि धन्या
Verse 5
सब सर सिंधु नदी नद नाना मंदाकिनि कर करहिं बखाना
Verse 6
उदय अस्त गिरि अरु कैलासू मंदर मेरु सकल सुरबासू
Verse 7
सैल हिमाचल आदिक जेते चित्रकूट जसु गावहिं तेते
Verse 8
बिंधि मुदित मन सुखु न समाई श्रम बिनु बिपुल बड़ाई पाई
Verse 9
चित्रकूट के बिहग मृग बेलि बिटप तृन जाति
Verse 10
पुन्य पुंज सब धन्य अस कहहिं देव दिन राति
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