Book 2 • Chapter 139
Section 139
10 verses
Verse 1
नयनवंत रघुबरहि बिलोकी पाइ जनम फल होहिं बिसोकी
Verse 2
परसि चरन रज अचर सुखारी भए परम पद के अधिकारी
Verse 3
सो बनु सैलु सुभायँ सुहावन मंगलमय अति पावन पावन
Verse 4
महिमा कहिअ कवनि बिधि तासू सुखसागर जहँ कीन्ह निवासू
Verse 5
पय पयोधि तजि अवध बिहाई जहँ सिय लखनु रामु रहे आई
Verse 6
कहि न सकहिं सुषमा जसि कानन जौं सत सहस होंहिं सहसानन
Verse 7
सो मैं बरनि कहौं बिधि केहीं डाबर कमठ कि मंदर लेहीं
Verse 8
सेवहिं लखनु करम मन बानी जाइ न सीलु सनेहु बखानी
Verse 9
-छिनु छिनु लखि सिय राम पद जानि आपु पर नेहु
Verse 10
करत न सपनेहुँ लखनु चितु बंधु मातु पितु गेहु
0:000:00
Speed: