Book 2 • Chapter 140
Section 140
10 verses
Verse 1
राम संग सिय रहति सुखारी पुर परिजन गृह सुरति बिसारी
Verse 2
छिनु छिनु पिय बिधु बदनु निहारी प्रमुदित मनहुँ चकोरकुमारी
Verse 3
नाह नेहु नित बढ़त बिलोकी हरषित रहति दिवस जिमि कोकी
Verse 4
सिय मनु राम चरन अनुरागा अवध सहस सम बनु प्रिय लागा
Verse 5
परनकुटी प्रिय प्रियतम संगा प्रिय परिवारु कुरंग बिहंगा
Verse 6
सासु ससुर सम मुनितिय मुनिबर असनु अमिअ सम कंद मूल फर
Verse 7
नाथ साथ साँथरी सुहाई मयन सयन सय सम सुखदाई
Verse 8
लोकप होहिं बिलोकत जासू तेहि कि मोहि सक बिषय बिलासू
Verse 9
-सुमिरत रामहि तजहिं जन तृन सम बिषय बिलासु
Verse 10
रामप्रिया जग जननि सिय कछु न आचरजु तासु
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