Book 2 • Chapter 148
Section 148
10 verses
Verse 1
अति आरति सब पूँछहिं रानी उतरु न आव बिकल भइ बानी
Verse 2
सुनइ न श्रवन नयन नहिं सूझा कहहु कहाँ नृप तेहि तेहि बूझा
Verse 3
दासिन्ह दीख सचिव बिकलाई कौसल्या गृहँ गईं लवाई
Verse 4
जाइ सुमंत्र दीख कस राजा अमिअ रहित जनु चंदु बिराजा
Verse 5
आसन सयन बिभूषन हीना परेउ भूमितल निपट मलीना
Verse 6
लेइ उसासु सोच एहि भाँती सुरपुर तें जनु खँसेउ जजाती
Verse 7
लेत सोच भरि छिनु छिनु छाती जनु जरि पंख परेउ संपाती
Verse 8
राम राम कह राम सनेही पुनि कह राम लखन बैदेही
Verse 9
देखि सचिवँ जय जीव कहि कीन्हेउ दंड प्रनामु
Verse 10
सुनत उठेउ ब्याकुल नृपति कहु सुमंत्र कहँ रामु
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