Book 2 • Chapter 196
Section 196
10 verses
Verse 1
कपटी कायर कुमति कुजाती लोक बेद बाहेर सब भाँती
Verse 2
राम कीन्ह आपन जबही तें भयउँ भुवन भूषन तबही तें
Verse 3
देखि प्रीति सुनि बिनय सुहाई मिलेउ बहोरि भरत लघु भाई
Verse 4
कहि निषाद निज नाम सुबानीं सादर सकल जोहारीं रानीं
Verse 5
जानि लखन सम देहिं असीसा जिअहु सुखी सय लाख बरीसा
Verse 6
निरखि निषादु नगर नर नारी भए सुखी जनु लखनु निहारी
Verse 7
कहहिं लहेउ एहिं जीवन लाहू भेंटेउ रामभद्र भरि बाहू
Verse 8
सुनि निषादु निज भाग बड़ाई प्रमुदित मन लइ चलेउ लेवाई
Verse 9
सनकारे सेवक सकल चले स्वामि रुख पाइ
Verse 10
घर तरु तर सर बाग बन बास बनाएन्हि जाइ
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