Book 2 • Chapter 204
Section 204
10 verses
Verse 1
झलका झलकत पायन्ह कैंसें पंकज कोस ओस कन जैसें
Verse 2
भरत पयादेहिं आए आजू भयउ दुखित सुनि सकल समाजू
Verse 3
खबरि लीन्ह सब लोग नहाए कीन्ह प्रनामु त्रिबेनिहिं आए
Verse 4
सबिधि सितासित नीर नहाने दिए दान महिसुर सनमाने
Verse 5
देखत स्यामल धवल हलोरे पुलकि सरीर भरत कर जोरे
Verse 6
सकल काम प्रद तीरथराऊ बेद बिदित जग प्रगट प्रभाऊ
Verse 7
मागउँ भीख त्यागि निज धरमू आरत काह न करइ कुकरमू
Verse 8
अस जियँ जानि सुजान सुदानी सफल करहिं जग जाचक बानी
Verse 9
अरथ न धरम न काम रुचि गति न चहउँ निरबान
Verse 10
जनम जनम रति राम पद यह बरदानु न आन
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