Book 2 • Chapter 211
Section 211
10 verses
Verse 1
मुनि समाजु अरु तीरथराजू साँचिहुँ सपथ अघाइ अकाजू
Verse 2
एहिं थल जौं किछु कहिअ बनाई एहि सम अधिक न अघ अधमाई
Verse 3
तुम्ह सर्बग्य कहउँ सतिभाऊ उर अंतरजामी रघुराऊ
Verse 4
मोहि न मातु करतब कर सोचू नहिं दुखु जियँ जगु जानिहि पोचू
Verse 5
नाहिन डरु बिगरिहि परलोकू पितहु मरन कर मोहि न सोकू
Verse 6
सुकृत सुजस भरि भुअन सुहाए लछिमन राम सरिस सुत पाए
Verse 7
राम बिरहँ तजि तनु छनभंगू भूप सोच कर कवन प्रसंगू
Verse 8
राम लखन सिय बिनु पग पनहीं करि मुनि बेष फिरहिं बन बनही
Verse 9
अजिन बसन फल असन महि सयन डासि कुस पात
Verse 10
बसि तरु तर नित सहत हिम आतप बरषा बात
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