Book 2 • Chapter 219
Section 219
10 verses
Verse 1
सुनु सुरेस उपदेसु हमारा रामहि सेवकु परम पिआरा
Verse 2
मानत सुखु सेवक सेवकाई सेवक बैर बैरु अधिकाई
Verse 3
जद्यपि सम नहिं राग न रोषू गहहिं न पाप पूनु गुन दोषू
Verse 4
करम प्रधान बिस्व करि राखा जो जस करइ सो तस फलु चाखा
Verse 5
तदपि करहिं सम बिषम बिहारा भगत अभगत हृदय अनुसारा
Verse 6
अगुन अलेप अमान एकरस रामु सगुन भए भगत पेम बस
Verse 7
राम सदा सेवक रुचि राखी बेद पुरान साधु सुर साखी
Verse 8
अस जियँ जानि तजहु कुटिलाई करहु भरत पद प्रीति सुहाई
Verse 9
राम भगत परहित निरत पर दुख दुखी दयाल
Verse 10
भगत सिरोमनि भरत तें जनि डरपहु सुरपाल
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