Book 2 • Chapter 221
Section 221
10 verses
Verse 1
जमुन तीर तेहि दिन करि बासू भयउ समय सम सबहि सुपासू
Verse 2
रातहिं घाट घाट की तरनी आईं अगनित जाहिं न बरनी
Verse 3
प्रात पार भए एकहि खेंवाँ तोषे रामसखा की सेवाँ
Verse 4
चले नहाइ नदिहि सिर नाई साथ निषादनाथ दोउ भाई
Verse 5
आगें मुनिबर बाहन आछें राजसमाज जाइ सबु पाछें
Verse 6
तेहिं पाछें दोउ बंधु पयादें भूषन बसन बेष सुठि सादें
Verse 7
सेवक सुह्रद सचिवसुत साथा सुमिरत लखनु सीय रघुनाथा
Verse 8
जहँ जहँ राम बास बिश्रामा तहँ तहँ करहिं सप्रेम प्रनामा
Verse 9
मगबासी नर नारि सुनि धाम काम तजि धाइ
Verse 10
देखि सरूप सनेह सब मुदित जनम फलु पाइ
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