Book 2 • Chapter 228
Section 228
10 verses
Verse 1
बिषई जीव पाइ प्रभुताई मूढ़ मोह बस होहिं जनाई
Verse 2
भरतु नीति रत साधु सुजाना प्रभु पद प्रेम सकल जगु जाना
Verse 3
तेऊ आजु राम पदु पाई चले धरम मरजाद मेटाई
Verse 4
कुटिल कुबंध कुअवसरु ताकी जानि राम बनवास एकाकी
Verse 5
करि कुमंत्रु मन साजि समाजू आए करै अकंटक राजू
Verse 6
कोटि प्रकार कलपि कुटलाई आए दल बटोरि दोउ भाई
Verse 7
जौं जियँ होति न कपट कुचाली केहि सोहाति रथ बाजि गजाली
Verse 8
भरतहि दोसु देइ को जाएँ जग बौराइ राज पदु पाएँ
Verse 9
ससि गुर तिय गामी नघुषु चढ़ेउ भूमिसुर जान
Verse 10
लोक बेद तें बिमुख भा अधम न बेन समान
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