Book 2 • Chapter 236
Section 236
10 verses
Verse 1
बन प्रदेस मुनि बास घनेरे जनु पुर नगर गाउँ गन खेरे
Verse 2
बिपुल बिचित्र बिहग मृग नाना प्रजा समाजु न जाइ बखाना
Verse 3
खगहा करि हरि बाघ बराहा देखि महिष बृष साजु सराहा
Verse 4
बयरु बिहाइ चरहिं एक संगा जहँ तहँ मनहुँ सेन चतुरंगा
Verse 5
झरना झरहिं मत्त गज गाजहिं मनहुँ निसान बिबिधि बिधि बाजहिं
Verse 6
चक चकोर चातक सुक पिक गन कूजत मंजु मराल मुदित मन
Verse 7
अलिगन गावत नाचत मोरा जनु सुराज मंगल चहु ओरा
Verse 8
बेलि बिटप तृन सफल सफूला सब समाजु मुद मंगल मूला
Verse 9
राम सैल सोभा निरखि भरत हृदयँ अति पेमु
Verse 10
तापस तप फलु पाइ जिमि सुखी सिरानें नेमु
0:000:00
Speed: