Book 2 • Chapter 237
Section 237
10 verses
Verse 1
तब केवट ऊँचें चढ़ि धाई कहेउ भरत सन भुजा उठाई
Verse 2
नाथ देखिअहिं बिटप बिसाला पाकरि जंबु रसाल तमाला
Verse 3
जिन्ह तरुबरन्ह मध्य बटु सोहा मंजु बिसाल देखि मनु मोहा
Verse 4
नील सघन पल्ल्व फल लाला अबिरल छाहँ सुखद सब काला
Verse 5
मानहुँ तिमिर अरुनमय रासी बिरची बिधि सँकेलि सुषमा सी
Verse 6
ए तरु सरित समीप गोसाँई रघुबर परनकुटी जहँ छाई
Verse 7
तुलसी तरुबर बिबिध सुहाए कहुँ कहुँ सियँ कहुँ लखन लगाए
Verse 8
बट छायाँ बेदिका बनाई सियँ निज पानि सरोज सुहाई
Verse 9
जहाँ बैठि मुनिगन सहित नित सिय रामु सुजान
Verse 10
सुनहिं कथा इतिहास सब आगम निगम पुरान
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