Book 2 • Chapter 244
Section 244
10 verses
Verse 1
आरत लोग राम सबु जाना करुनाकर सुजान भगवाना
Verse 2
जो जेहि भायँ रहा अभिलाषी तेहि तेहि कै तसि तसि रुख राखी
Verse 3
सानुज मिलि पल महु सब काहू कीन्ह दूरि दुखु दारुन दाहू
Verse 4
यह बड़ि बातँ राम कै नाहीं जिमि घट कोटि एक रबि छाहीं
Verse 5
मिलि केवटिहि उमगि अनुरागा पुरजन सकल सराहहिं भागा
Verse 6
देखीं राम दुखित महतारीं जनु सुबेलि अवलीं हिम मारीं
Verse 7
प्रथम राम भेंटी कैकेई सरल सुभायँ भगति मति भेई
Verse 8
पग परि कीन्ह प्रबोधु बहोरी काल करम बिधि सिर धरि खोरी
Verse 9
भेटीं रघुबर मातु सब करि प्रबोधु परितोषु
Verse 10
अंब ईस आधीन जगु काहु न देइअ दोषु
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