Book 2 • Chapter 246
Section 246
10 verses
Verse 1
सीय आइ मुनिबर पग लागी उचित असीस लही मन मागी
Verse 2
गुरपतिनिहि मुनितियन्ह समेता मिली पेमु कहि जाइ न जेता
Verse 3
बंदि बंदि पग सिय सबही के आसिरबचन लहे प्रिय जी के
Verse 4
सासु सकल जब सीयँ निहारीं मूदे नयन सहमि सुकुमारीं
Verse 5
परीं बधिक बस मनहुँ मरालीं काह कीन्ह करतार कुचालीं
Verse 6
तिन्ह सिय निरखि निपट दुखु पावा सो सबु सहिअ जो दैउ सहावा
Verse 7
जनकसुता तब उर धरि धीरा नील नलिन लोयन भरि नीरा
Verse 8
मिली सकल सासुन्ह सिय जाई तेहि अवसर करुना महि छाई
Verse 9
लागि लागि पग सबनि सिय भेंटति अति अनुराग
Verse 10
हृदयँ असीसहिं पेम बस रहिअहु भरी सोहाग
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