Book 2 • Chapter 254
Section 254
10 verses
Verse 1
बोले मुनिबरु समय समाना सुनहु सभासद भरत सुजाना
Verse 2
धरम धुरीन भानुकुल भानू राजा रामु स्वबस भगवानू
Verse 3
सत्यसंध पालक श्रुति सेतू राम जनमु जग मंगल हेतू
Verse 4
गुर पितु मातु बचन अनुसारी खल दलु दलन देव हितकारी
Verse 5
नीति प्रीति परमारथ स्वारथु कोउ न राम सम जान जथारथु
Verse 6
बिधि हरि हरु ससि रबि दिसिपाला माया जीव करम कुलि काला
Verse 7
अहिप महिप जहँ लगि प्रभुताई जोग सिद्धि निगमागम गाई
Verse 8
करि बिचार जिंयँ देखहु नीकें राम रजाइ सीस सबही कें
Verse 9
राखें राम रजाइ रुख हम सब कर हित होइ
Verse 10
समुझि सयाने करहु अब सब मिलि संमत सोइ
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