Book 2 • Chapter 253
Section 253
10 verses
Verse 1
कीन्ही मातु मिस काल कुचाली ईति भीति जस पाकत साली
Verse 2
केहि बिधि होइ राम अभिषेकू मोहि अवकलत उपाउ न एकू
Verse 3
अवसि फिरहिं गुर आयसु मानी मुनि पुनि कहब राम रुचि जानी
Verse 4
मातु कहेहुँ बहुरहिं रघुराऊ राम जननि हठ करबि कि काऊ
Verse 5
मोहि अनुचर कर केतिक बाता तेहि महँ कुसमउ बाम बिधाता
Verse 6
जौं हठ करउँ त निपट कुकरमू हरगिरि तें गुरु सेवक धरमू
Verse 7
एकउ जुगुति न मन ठहरानी सोचत भरतहि रैनि बिहानी
Verse 8
प्रात नहाइ प्रभुहि सिर नाई बैठत पठए रिषयँ बोलाई
Verse 9
गुर पद कमल प्रनामु करि बैठे आयसु पाइ
Verse 10
बिप्र महाजन सचिव सब जुरे सभासद आइ
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