Book 2 • Chapter 257
Section 257
10 verses
Verse 1
भरत बचन सुनि देखि सनेहू सभा सहित मुनि भए बिदेहू
Verse 2
भरत महा महिमा जलरासी मुनि मति ठाढ़ि तीर अबला सी
Verse 3
गा चह पार जतनु हियँ हेरा पावति नाव न बोहितु बेरा
Verse 4
औरु करिहि को भरत बड़ाई सरसी सीपि कि सिंधु समाई
Verse 5
भरतु मुनिहि मन भीतर भाए सहित समाज राम पहिं आए
Verse 6
प्रभु प्रनामु करि दीन्ह सुआसनु बैठे सब सुनि मुनि अनुसासनु
Verse 7
बोले मुनिबरु बचन बिचारी देस काल अवसर अनुहारी
Verse 8
सुनहु राम सरबग्य सुजाना धरम नीति गुन ग्यान निधाना
Verse 9
सब के उर अंतर बसहु जानहु भाउ कुभाउ
Verse 10
पुरजन जननी भरत हित होइ सो कहिअ उपाउ
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