Book 2 • Chapter 278
Section 278
10 verses
Verse 1
जे महिसुर दसरथ पुर बासी जे मिथिलापति नगर निवासी
Verse 2
हंस बंस गुर जनक पुरोधा जिन्ह जग मगु परमारथु सोधा
Verse 3
लगे कहन उपदेस अनेका सहित धरम नय बिरति बिबेका
Verse 4
कौसिक कहि कहि कथा पुरानीं समुझाई सब सभा सुबानीं
Verse 5
तब रघुनाथ कोसिकहि कहेऊ नाथ कालि जल बिनु सबु रहेऊ
Verse 6
मुनि कह उचित कहत रघुराई गयउ बीति दिन पहर अढ़ाई
Verse 7
रिषि रुख लखि कह तेरहुतिराजू इहाँ उचित नहिं असन अनाजू
Verse 8
कहा भूप भल सबहि सोहाना पाइ रजायसु चले नहाना
Verse 9
तेहि अवसर फल फूल दल मूल अनेक प्रकार
Verse 10
लइ आए बनचर बिपुल भरि भरि काँवरि भार
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