Book 2 • Chapter 277
Section 277
10 verses
Verse 1
जासु ग्यानु रबि भव निसि नासा बचन किरन मुनि कमल बिकासा
Verse 2
तेहि कि मोह ममता निअराई यह सिय राम सनेह बड़ाई
Verse 3
बिषई साधक सिद्ध सयाने त्रिबिध जीव जग बेद बखाने
Verse 4
राम सनेह सरस मन जासू साधु सभाँ बड़ आदर तासू
Verse 5
सोह न राम पेम बिनु ग्यानू करनधार बिनु जिमि जलजानू
Verse 6
मुनि बहुबिधि बिदेहु समुझाए रामघाट सब लोग नहाए
Verse 7
सकल सोक संकुल नर नारी सो बासरु बीतेउ बिनु बारी
Verse 8
पसु खग मृगन्ह न कीन्ह अहारू प्रिय परिजन कर कौन बिचारू
Verse 9
दोउ समाज निमिराजु रघुराजु नहाने प्रात
Verse 10
बैठे सब बट बिटप तर मन मलीन कृस गात
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