Book 2 • Chapter 276
Section 276
8 verses
Verse 1
बोरति ग्यान बिराग करारे बचन ससोक मिलत नद नारे
Verse 2
सोच उसास समीर तंरगा धीरज तट तरुबर कर भंगा
Verse 3
बिषम बिषाद तोरावति धारा भय भ्रम भवँर अबर्त अपारा
Verse 4
केवट बुध बिद्या बड़ि नावा सकहिं न खेइ ऐक नहिं आवा
Verse 5
बनचर कोल किरात बिचारे थके बिलोकि पथिक हियँ हारे
Verse 6
आश्रम उदधि मिली जब जाई मनहुँ उठेउ अंबुधि अकुलाई
Verse 7
सोक बिकल दोउ राज समाजा रहा न ग्यानु न धीरजु लाजा
Verse 8
भूप रूप गुन सील सराही रोवहिं सोक सिंधु अवगाही
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