Book 2 • Chapter 280
Section 280
10 verses
Verse 1
एहि बिधि बासर बीते चारी रामु निरखि नर नारि सुखारी
Verse 2
दुहु समाज असि रुचि मन माहीं बिनु सिय राम फिरब भल नाहीं
Verse 3
सीता राम संग बनबासू कोटि अमरपुर सरिस सुपासू
Verse 4
परिहरि लखन रामु बैदेही जेहि घरु भाव बाम बिधि तेही
Verse 5
दाहिन दइउ होइ जब सबही राम समीप बसिअ बन तबही
Verse 6
मंदाकिनि मज्जनु तिहु काला राम दरसु मुद मंगल माला
Verse 7
अटनु राम गिरि बन तापस थल असनु अमिअ सम कंद मूल फल
Verse 8
सुख समेत संबत दुइ साता पल सम होहिं न जनिअहिं जाता
Verse 9
एहि सुख जोग न लोग सब कहहिं कहाँ अस भागु
Verse 10
सहज सुभायँ समाज दुहु राम चरन अनुरागु
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