Book 2 • Chapter 281
Section 281
10 verses
Verse 1
एहि बिधि सकल मनोरथ करहीं बचन सप्रेम सुनत मन हरहीं
Verse 2
सीय मातु तेहि समय पठाईं दासीं देखि सुअवसरु आईं
Verse 3
सावकास सुनि सब सिय सासू आयउ जनकराज रनिवासू
Verse 4
कौसल्याँ सादर सनमानी आसन दिए समय सम आनी
Verse 5
सीलु सनेह सकल दुहु ओरा द्रवहिं देखि सुनि कुलिस कठोरा
Verse 6
पुलक सिथिल तन बारि बिलोचन महि नख लिखन लगीं सब सोचन
Verse 7
सब सिय राम प्रीति कि सि मूरती जनु करुना बहु बेष बिसूरति
Verse 8
सीय मातु कह बिधि बुधि बाँकी जो पय फेनु फोर पबि टाँकी
Verse 9
सुनिअ सुधा देखिअहिं गरल सब करतूति कराल
Verse 10
जहँ तहँ काक उलूक बक मानस सकृत मराल
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