Book 2 • Chapter 289
Section 289
10 verses
Verse 1
अगम सबहि बरनत बरबरनी जिमि जलहीन मीन गमु धरनी
Verse 2
भरत अमित महिमा सुनु रानी जानहिं रामु न सकहिं बखानी
Verse 3
बरनि सप्रेम भरत अनुभाऊ तिय जिय की रुचि लखि कह राऊ
Verse 4
बहुरहिं लखनु भरतु बन जाहीं सब कर भल सब के मन माहीं
Verse 5
देबि परंतु भरत रघुबर की प्रीति प्रतीति जाइ नहिं तरकी
Verse 6
भरतु अवधि सनेह ममता की जद्यपि रामु सीम समता की
Verse 7
परमारथ स्वारथ सुख सारे भरत न सपनेहुँ मनहुँ निहारे
Verse 8
साधन सिद्ध राम पग नेहू मोहि लखि परत भरत मत एहू
Verse 9
भोरेहुँ भरत न पेलिहहिं मनसहुँ राम रजाइ
Verse 10
करिअ न सोचु सनेह बस कहेउ भूप बिलखाइ
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