Book 2 • Chapter 3
Section 3
10 verses
Verse 1
कहइ भुआलु सुनिअ मुनिनायक भए राम सब बिधि सब लायक
Verse 2
सेवक सचिव सकल पुरबासी जे हमारे अरि मित्र उदासी
Verse 3
सबहि रामु प्रिय जेहि बिधि मोही प्रभु असीस जनु तनु धरि सोही
Verse 4
बिप्र सहित परिवार गोसाईं करहिं छोहु सब रौरिहि नाई
Verse 5
जे गुर चरन रेनु सिर धरहीं ते जनु सकल बिभव बस करहीं
Verse 6
मोहि सम यहु अनुभयउ न दूजें सबु पायउँ रज पावनि पूजें
Verse 7
अब अभिलाषु एकु मन मोरें पूजहि नाथ अनुग्रह तोरें
Verse 8
मुनि प्रसन्न लखि सहज सनेहू कहेउ नरेस रजायसु देहू
Verse 9
राजन राउर नामु जसु सब अभिमत दातार
Verse 10
फल अनुगामी महिप मनि मन अभिलाषु तुम्हार
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